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Prashna (Nadi Astrology) a Contemporary Treatise [English] Pradeep Bhushan Goel प्रस्तुत ग्रन्थ जातक परिजात श्री

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Prashna (Nadi Astrology) a Contemporary Treatise [English] Pradeep Bhushan Goel प्रस्तुत ग्रन्थ जातक परिजात श्री प्रस्तुत ग्रन्थ जातक परिजात श्री वैद्यनाथ दीक्षित द्वारा रचित ज्योतिष साहित्य के नव रत्नों में से एक हैl १८ अध्यायों में विभक्त प्रस्तुत ग्रन्थ में विद्वान रचनाकार ने निर्द्वन्द रूप से पाराशरी मत का पूर्ण आदर सम्मान करते हुए अपने नवीन मत एवम अनुभवों को सार्थक रूप में प्रस्तुत किया है ।प्रस्तुत ग्रन्थ का पठन "बृहज्ज़ातक" एवम "सारावली" के मनन करने के पश्चात करना उच्चता है l बृहज्ज़ातक की आवश्यकता को ध्यान में रखकर कल्याण वर्मा ने सारावली की रचना की परंतु सारावली में भी कुछ महत्वपूर्ण विषयों के अभाव के कारण ही जातक पारिजात की रचना की गई है lफलदीपिका शंकाओ और उलझनों से हमारा वास्ता पड़ता है जिनका समुचित समाधान किसी ग्रन्थ में उपलब्ध नहीं है l ऐसी उलझने शास्त्रज्ञान होने पर भी शास्त्र के मूलस्तर को बारीकी से न पकड़ पाने के कारण ही उत्पन्न होती है l वराहमिहिर ने ज्योतिषी की मौलिक योग्यताए बताते हुए कहा है कि दैवज्ञ को 'न पर्षद भीरु ' और ' पृष्ठभीध्यायी' होना चाहिए l अर्थार्त वह सभा ने बैठे हुए जिज्ञासुओ द्वारा प्रश्न पूछने पर आँखे न चुराने वाला और पूछे गए प्रश्नों का समुचित उत्तर देकर उनकी शंकाओ का समाधान करने वाला हो ग्रन्थ में २०० से अधिक ऐसे ही प्रश्नों का समाधान है

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